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होलिका दहन

21 मार्च 2027 · रविवार फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा

फाल्गुन माह 2027 में होलिका दहन कब है?

संक्षिप्त उत्तर

होलिका दहन 2027 कब है?

होलिका दहन 2027 रविवार, 21 मार्च 2027 को मनाई जाएगी। होलिका दहन की तिथि फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा है। होलिका दहन की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:01 – 08:26 तक रहेगा।

दिनांक21 मार्च 2027
तिथिफाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त06:01 – 08:26
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा फाल्गुन माह के व्रत-त्यौहार
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्रपूर्व फाल्गुनीशूल
संक्षिप्त परिचय

होलिका दहन का महत्व और उत्सव

होलिका दहन फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्रपूर्व फाल्गुनी
योगशूल
करणगर
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

होलिका दहन के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:25 – 05:13 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:01 – 08:26 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:41 – 12:29 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:31 – 17:20 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:21 – 18:33 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 16:38 – 18:09 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 21 Mar 06:21 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:25–05:13
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:01–08:26
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:41 – 12:29
तिथि समाप्त 22 Mar 04:13 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:21–18:33

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

होलिका दहन — महत्व, कथा और परंपरा

होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि की संध्या में किया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व होली उत्सव का आरंभिक चरण है, जिसे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलिका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद और उसकी बुआ होलिका से जुड़ी है। दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए अनेक प्रयास किए, लेकिन जब वह असफल रहा, तो उसने अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, परंतु जब वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी, तो स्वयं जल गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गया। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल के दौरान करना शुभ माना जाता है। इस समय लोग होलिका की अग्नि में अन्न और अन्य सामग्री जैसे गेहूं, चना, नारियल आदि अर्पित करते हैं। इसके साथ ही होलिका की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की कामना की जाती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

होलिका दहन की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
अंतिम संशोधन28 Mar 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में होलिका दहन 21 मार्च 2027 (रविवार) को है।
होलिका दहन फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।