प्रत्येक वर्ष फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक का आरंभ होता है और इसका समापन होलिका दहन के दिन होता है। इस अवधि को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। इस दिन संतान प्राप्ति की कामना से लड्डू गोपाल की पूजा करते समय हवन करना शुभ माना जाता है, साथ ही श्रीकृष्ण के मंत्र “कृं कृष्णाय नमः” का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि होलाष्टक के प्रारंभ के दिन ही भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था, जिसके कारण इस काल में सभी ग्रह उग्र अवस्था में माने जाते हैं। इसलिए इस दौरान जन्म और मृत्यु से संबंधित अनिवार्य कार्यों को छोड़कर अन्य कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। होलाष्टक के दिनों में पूजा-पाठ, भजन और भगवान के स्मरण को अत्यंत फलदायक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय विवाह, गृह प्रवेश, वाहन या घर की खरीद जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह काल इन कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।