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हयग्रीव जयन्ती

27 अगस्त 2026 · गुरुवार श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा

श्रावण माह 2026 में हयग्रीव जयन्ती कब है?

संक्षिप्त उत्तर

हयग्रीव जयन्ती 2026 कब है?

हयग्रीव जयन्ती 2026 गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। हयग्रीव जयन्ती की तिथि श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा है। हयग्रीव जयन्ती की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:37 – 08:10 तक रहेगा।

दिनांक27 अगस्त 2026
तिथिश्रावण, शुक्ल पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त05:37 – 08:10
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, शुक्ल पूर्णिमा श्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान विष्णु
वार-देवताभगवान विष्णुगुरुवार
नक्षत्रधनिष्ठाशोभन
संक्षिप्त परिचय

हयग्रीव जयन्ती का महत्व और उत्सव

हयग्रीव जयन्ती श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्रधनिष्ठा
योगशोभन
करणवणिज
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलदक्षिणदही खाकर

हयग्रीव जयन्ती के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:01 – 04:49 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:37 – 08:10 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:34 – 12:25 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:40 – 17:31 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:34 – 18:46 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 13:35 – 15:11 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 27 Aug 09:08 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:01–04:49
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:37–08:10
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:34 – 12:25
तिथि समाप्त 28 Aug 09:48 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:34–18:46

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

हयग्रीव जयन्ती — महत्व, कथा और परंपरा

श्रावण पूर्णिमा पर मनाई जाने वाली हयग्रीव जयंती विद्या-स्मृति का पावन पर्व है। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने घोड़े-मुखी हयग्रीव रूप धारण कर असुरों से चारों वेद पुनः प्राप्त किए; इसलिए इस तिथि पर बुद्धि, अनुसंधान और परीक्षा-सफलता के लिए विशेष साधना की जाती है। भक्त पीले या श्वेत वस्त्र पहनकर श्वेत कमल अथवा कनेर, तुलसी-दल, मिश्री-शक्कर और घी-दीप अर्पित करते हैं और रुद्राक्ष-माला से “ॐ ह्रीं हयग्रीवाय नमः” मंत्र का 108 या 1008 बार जप कर स्मरण-शक्ति बढ़ाने का संकल्प लेते हैं। वेद-पाठ, हयग्रीव स्तोत्र या श्रीसूक्त का पाठ करने के बाद ताम्रपत्र या पुस्तक पर रोली से “ॐ” लिखकर गुरुदक्षिणा समर्पित की जाती है। रात्रि-पूजा के उपरांत पुस्तकें, लेखन-साधन और अध्ययन-उपकरण प्रभु के चरणों में रखकर स्वाध्याय आरम्भ करने से वर्ष-भर ज्ञान-रक्षा और प्रेरणा का आशीर्वाद मिलता है।

 

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

हयग्रीव जयन्ती की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, शुक्ल पूर्णिमा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान विष्णु
अंतिम संशोधन27 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में हयग्रीव जयन्ती 27 अगस्त 2026 (गुरुवार) को है।
हयग्रीव जयन्ती श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।