हरियाली अमावस्या — महत्व, कथा और परंपरा
श्रावण मास की अमावस्या ‘हरियाली अमावस्या’ कहलाती है। यह तिथि पितरों के तर्पण-श्राद्ध के साथ प्रकृति की आराधना का भी संदेश देती है। परम्परा है कि इस दिन पीपल और तुलसी को जल देकर पूजा की जाती है तथा आम, आँवला, नीम, बरगद आदि के पौधे रोपे जाते हैं। मान्यता है कि वृक्षारोपण से घर-परिवार में सुख, शान्ति और समृद्धि बनी रहती है और वायु शुद्ध होती है। सूर्योदय के समय ताम्र पात्र में जल, लाल चन्दन और अक्षत मिश्रित कर सूर्यदेव को अर्पित किया जाता है, फिर तुलसी-वृत्त की परिक्रमा की जाती है। साथ ही पिंडदान कर पूर्वजों से जाने-अनजाने अपराधों की क्षमायाचना की जाती है। हरियाली अमावस्या प्रकृति-संरक्षण और पारिवारिक कर्तव्य दोनों का सटीक संयोग है।