श्री हनुमान जी का प्राकट्योत्सव या हनुमान जयंती चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार त्रेतायुग में इसी पावन तिथि पर भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी का प्राकट्य हुआ था। चैत्र का महीना वसंत ऋतु का समय होता है, जब प्रकृति में शक्ति, चेतना और नवीनता का संचार होता है, और यही भाव हनुमान जयंती के आध्यात्मिक स्वरूप में भी दिखाई देता है। मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म मंगलवार के दिन हुआ था, इसी कारण मंगलवार को उनके पूजन का विशेष महत्व है और मंदिरों में भक्तों की बड़ी संख्या दर्शन के लिए उमड़ती है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार हनुमान जी का प्राकट्योत्सव वर्ष में दो बार मनाया जाता है—एक बार चैत्र पूर्णिमा को और दूसरा कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को। इस दिन व्रत, हनुमान चालीसा पाठ और सेवा-भक्ति करने से बल, बुद्धि और निर्भयता की प्राप्ति मानी जाती है।