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हल षष्ठी

2 सितंबर 2026 · बुधवार भाद्रपद, कृष्ण षष्ठी

भाद्रपद माह 2026 में हल षष्ठी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

हल षष्ठी 2026 कब है?

हल षष्ठी 2026 बुधवार, 2 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। हल षष्ठी की तिथि भाद्रपद, कृष्ण षष्ठी है। हल षष्ठी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:39 – 08:10 तक रहेगा।

दिनांक2 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद, कृष्ण षष्ठी
पूजा मुहूर्त05:39 – 08:10
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिभाद्रपद, कृष्ण षष्ठी भाद्रपद माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान बलराम
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रभरणीध्रुव
संक्षिप्त परिचय

हल षष्ठी का महत्व और उत्सव

हल षष्ठी भाद्रपद, कृष्ण षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान बलराम की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण पंचमी
नक्षत्रभरणी
योगध्रुव
करणतैतिल
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

हल षष्ठी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:03 – 04:51 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:39 – 08:10 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:32 – 12:23 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:35 – 17:25 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:28 – 18:40 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 11:57 – 13:32 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 02 Sep 06:12 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:03–04:51
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:39–08:10
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:32 – 12:23
तिथि समाप्त 03 Sep 04:25 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:28–18:40

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

हल षष्ठी — महत्व, कथा और परंपरा

हल षष्ठी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला एक लोक-आस्था से जुड़ा व्रत है, जिसे हरछठ या ललही छठ भी कहा जाता है। यह दिन खासतौर पर माताएँ अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुरक्षित जीवन की कामना के लिए रखती हैं। भगवान बलराम को इस अवसर पर हलधर रूप में याद किया जाता है, उनका हल हमें धरती, खेती और श्रम की अहमियत का एहसास कराता है। इस व्रत की सबसे खास बात इसके नियम हैं। परंपरा के अनुसार, इस दिन हल से जोती गई जमीन का अन्न नहीं खाया जाता और गाय के दूध-दही से भी परहेज़ किया जाता है। इसके बजाय साधारण, प्राकृतिक आहार लिया जाता है, जैसे फल या भैंस के दूध से बनी चीजें। कई जगहों पर महिलाएँ तालाब या नदी के किनारे पूजा करती हैं और अपनी संतान के सुखी भविष्य की प्रार्थना करती हैं। सीधी बात है, यह व्रत सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि मातृत्व, सादगी और प्रकृति के साथ जुड़े रहने की एक पुरानी और गहरी परंपरा को जीवित रखता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

हल षष्ठी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिभाद्रपद, कृष्ण षष्ठी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान बलराम
अंतिम संशोधन23 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में हल षष्ठी 2 सितंबर 2026 (बुधवार) को है।
हल षष्ठी भाद्रपद, कृष्ण षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।