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गायत्री जयंती

14 जून 2027 · सोमवार वैशाख, शुक्ल एकादशी

देवी गायत्री की जयंती कब है?

संक्षिप्त उत्तर

गायत्री जयंती 2027 कब है?

गायत्री जयंती 2027 सोमवार, 14 जून 2027 को मनाई जाएगी। गायत्री जयंती की तिथि वैशाख, शुक्ल एकादशी है। गायत्री जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:07 – 07:51 तक रहेगा।

दिनांक14 जून 2027
तिथिवैशाख, शुक्ल एकादशी
पूजा मुहूर्त05:07 – 07:51
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिवैशाख, शुक्ल एकादशीज्येष्ठ माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताGoddess Gayatri
वार-देवताशिव जीसोमवार
नक्षत्रचित्रावरीयान
संक्षिप्त परिचय

गायत्री जयंती का महत्व और उत्सव

गायत्री जयंती वैशाख, शुक्ल एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन Goddess Gayatri की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल एकादशी
नक्षत्रचित्रा
योगवरीयान
करणवणिज
ऋतुग्रीष्मउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

गायत्री जयंती के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:31 – 04:19 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:07 – 07:51 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:30 – 12:25 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:59 – 17:54 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 18:01 – 19:13 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 06:50 – 08:32 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 14 Jun 02:11 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:31–04:19
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:07–07:51
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:30 – 12:25
तिथि समाप्त 15 Jun 02:07 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 18:01–19:13

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

गायत्री जयंती — महत्व, कथा और परंपरा

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को माँ गायत्री के प्राकट्य का पावन उत्सव मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में माता गायत्री को सृष्टि की जननी तथा वेदों की जन्मदाता माना गया है; इसीलिए वह “वेदमाता” के नाम से भी विख्यात हैं। कहा जाता है कि गायत्री मंत्र ही वेदों का सार है। माता की कृपा से भगवान ब्रह्मा ने अपने चारों मुखों से इस मंत्र की व्याख्या करते हुए चारों वेद प्रकट किए। प्रारम्भ में गायत्री की महिमा केवल देवलोक तक सीमित थी, किंतु महर्षि विश्वामित्र ने कठोर तपस्या द्वारा इसे जन-जन तक पहुँचाया। अथर्ववेद में माँ गायत्री को आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और ब्रह्मतेज प्रदान करने वाली देवी बताया गया है; अतः इस एकादशी पर उनका स्मरण और पूजन साधक को सर्वांगीण कल्याण का वरदान देता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

गायत्री जयंती की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिवैशाख, शुक्ल एकादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवGoddess Gayatri
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में गायत्री जयंती 14 जून 2027 (सोमवार) को है।
गायत्री जयंती वैशाख, शुक्ल एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।