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गंगा सप्तमी

12 मई 2027 · बुधवार वैसाख, शुक्ल सप्तमी

वैसाख माह 2027 में गंगा सप्तमी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

गंगा सप्तमी 2027 कब है?

गंगा सप्तमी 2027 बुधवार, 12 मई 2027 को मनाई जाएगी। गंगा सप्तमी की तिथि वैसाख, शुक्ल सप्तमी है। गंगा सप्तमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:15 – 07:54 तक रहेगा।

दिनांक12 मई 2027
तिथिवैसाख, शुक्ल सप्तमी
पूजा मुहूर्त05:15 – 07:54
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिवैसाख, शुक्ल सप्तमी वैसाख माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतामाँ गंगा
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रपुष्यगण्ड
संक्षिप्त परिचय

गंगा सप्तमी का महत्व और उत्सव

गंगा सप्तमी वैसाख, शुक्ल सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन माँ गंगा की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल सप्तमी
नक्षत्रपुष्य
योगगण्ड
करणगर
ऋतुग्रीष्मउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

गंगा सप्तमी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:39 – 04:27 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:15 – 07:54 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:27 – 12:21 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:47 – 17:40 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:46 – 18:58 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 11:54 – 13:34 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 12 May 01:23 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:39–04:27
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:15–07:54
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:27 – 12:21
तिथि समाप्त 12 May 11:12 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:46–18:58

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

गंगा सप्तमी — महत्व, कथा और परंपरा

गंगा सप्तमी का पर्व वैसाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। वैसाख का महीना स्नान, दान और आत्मशुद्धि के लिए विशेष रूप से पुण्यदायी माना गया है, और इसी मास में माँ गंगा से जुड़े पर्वों का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन को गंगा जयंती या गंगा पूजन भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को माँ गंगा की उत्पत्ति हुई थी और वे स्वर्गलोक से भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं। जान्हु ऋषि के कान से प्रवाहित होने के कारण यह तिथि जान्हु सप्तमी भी कहलाती है, और इसी से माँ गंगा का नाम जान्हवी पड़ा। गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी में स्नान करने या गंगाजल मिलाकर स्नान करने से पापों का नाश और दुख-क्लेशों से मुक्ति मानी जाती है। इस दिन माँ गंगा की पूजा कर शुद्धता, शांति और कल्याण की कामना की जाती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

गंगा सप्तमी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिवैसाख, शुक्ल सप्तमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवमाँ गंगा
अंतिम संशोधन06 Jul 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में गंगा सप्तमी 12 मई 2027 (बुधवार) को है।
गंगा सप्तमी वैसाख, शुक्ल सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।