अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए यह तिथि अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन विघ्नहर्ता गणेश जी का विधि-विधान से पूजन और व्रत किया जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करता है, उसके जीवन के सभी दुख और बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस अवसर पर धन-धान्य की वृद्धि और सम्मान में बढ़ोतरी के लिए भगवान गणेश को दुर्वा (दूब) अर्पित की जाती है, जो उन्हें अत्यंत प्रिय मानी जाती है। गणेश जी की कृपा से व्यक्ति की बुद्धि प्रखर होती है और उसके सभी कार्य बिना किसी विघ्न के सफलतापूर्वक पूर्ण होते हैं। व्रत के नियमों के अनुसार, इस दिन जमीन के भीतर उगने वाले कंद-मूल का सेवन वर्जित माना गया है। इसलिए मूली, प्याज, गाजर और चुकंदर जैसी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।