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द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत

10 अगस्त 2026 · सोमवार श्रावण, कृष्ण द्वादशी

श्रावण माह 2026 में द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत 2026 कब है?

द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत 2026 सोमवार, 10 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत की तिथि श्रावण, कृष्ण द्वादशी है। द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:30 – 08:07 तक रहेगा।

दिनांक10 अगस्त 2026
तिथि श्रावण, कृष्ण द्वादशी
पूजा मुहूर्त05:30 – 08:07
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथि श्रावण, कृष्ण द्वादशीश्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान शिव
वार-देवताशिव जीसोमवार
नक्षत्रआर्द्रावज्र
संक्षिप्त परिचय

द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत का महत्व और उत्सव

द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत श्रावण, कृष्ण द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण द्वादशी
नक्षत्रआर्द्रा
योगवज्र
करणतैतिल
ऋतुवर्षादक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:54 – 04:42 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:30 – 08:07 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:37 – 12:29 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:52 – 17:44 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:49 – 19:01 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 07:08 – 08:46 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 10 Aug 05:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:54–04:42
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:30–08:07
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:37 – 12:29
तिथि समाप्त 11 Aug 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:49–19:01

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

द्वितीय श्रावण सोमवार वर्षा-ऋतु की पावन छाया में भगवान शिव की विशेष उपासना का दिवस है। इस दिन महाकालेश्वर का पूजन कर रुद्राक्ष-माला से “ॐ महाशिवाय वरदाय हीं ऐं काम्य सिद्धि रुद्राय नमः” मंत्र का कम-से-कम 11 माला जाप करना श्रेयस्कर माना गया है। शिव-आराधना के साथ माता पार्वती, सूर्यदेव और पुत्र कार्तिकेय की पूजा भी अनिवार्य मानी जाती है, जिससे परिवार में सौहार्द, शक्ति और तेज का संचार होता है। उपवास रखकर गंगाजल, चंदन, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा या आक-पुष्प से शिवलिंग का अभिषेक करना शास्त्रसम्मत विधान है। श्रावण के प्रत्येक सोमवार में यह साधना भक्त की कामनाओं को सिद्ध करने तथा तन-मन को पवित्र करने का प्राचीन, परखा हुआ मार्ग बताया गया है।

मंत्र संग्रह

द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत से संबंधित मंत्र

सभी मंत्र →

शिव मूल मंत्र

ॐ नमः शिवाय

“ॐ नमः शिवाय” का अर्थ है—मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ। इसमें “ॐ” परम चेतना, “नमः” विनम्र समर्पण और “शिवाय” कल्याणकारी भ…

पूरा मंत्र पढ़ें →
विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथि श्रावण, कृष्ण द्वादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान शिव
अंतिम संशोधन19 Aug 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत 10 अगस्त 2026 (सोमवार) को है।
द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत श्रावण, कृष्ण द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।