देवी मातंगी प्राकट्योत्सव वैसाख मास में श्रद्धा और साधना के साथ मनाया जाता है। वैसाख का महीना तप, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है, जब देवी उपासना विशेष फल प्रदान करती है। देवी मातंगी को वाणी, संगीत और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है और वे दस महाविद्याओं में नवमी महाविद्या हैं। श्याम वर्ण धारण करने वाली देवी मातंगी के मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है और उनकी चार भुजाएँ चारों वेदों का प्रतीक मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यता है कि देवी मातंगी की साधना से गृहस्थ जीवन में सुख, समृद्धि और सौहार्द बना रहता है। वे साधक को मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों से मुक्त करती हैं। उनका महामंत्र “क्रीं ह्रीं मातंगी ह्रीं क्रीं स्वाहा” अत्यंत प्रभावशाली माना गया है और इसके जप से वाणी, बुद्धि और साधना में सिद्धि प्राप्त होती है।