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देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव

23 सितंबर 2026 · बुधवार भाद्रपद, शुक्ल द्वादशी

भाद्रपद माह 2026 में देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव कब है?

संक्षिप्त उत्तर

देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव 2026 कब है?

देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव 2026 बुधवार, 23 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव की तिथि भाद्रपद, शुक्ल द्वादशी है। देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:47 – 08:12 तक रहेगा।

दिनांक23 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद, शुक्ल द्वादशी
पूजा मुहूर्त05:47 – 08:12
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिभाद्रपद, शुक्ल द्वादशीभाद्रपद माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतादेवी भुवनेश्वरी
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रश्रवणसुकर्मा
संक्षिप्त परिचय

देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव का महत्व और उत्सव

देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव भाद्रपद, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन देवी भुवनेश्वरी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वादशी
नक्षत्रश्रवण
योगसुकर्मा
करणबव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:11 – 04:59 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:47 – 08:12 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:26 – 12:14 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:17 – 17:05 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:06 – 18:18 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 11:50 – 13:21 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 22 Sep 09:43 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:11–04:59
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:47–08:12
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:26 – 12:14
तिथि समाप्त 23 Sep 10:50 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:06–18:18

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव — महत्व, कथा और परंपरा

देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव भुवनेश्वरी जयंती आदिशक्ति के उस दिव्य स्वरूप का स्मरण कराता है जिन्हें समस्त सृष्टि की अधिष्ठात्री और ‘राजराजेश्वरी’ के रूप में पूजा जाता है। तांत्रिक परंपराओं में उन्हें उस मूल शक्ति के रूप में माना गया है, जिससे सृष्टि की उत्पत्ति और उसका संचालन संभव होता है। इस अवसर पर साधक श्रद्धा के साथ स्नान-ध्यान कर देवी की उपासना करते हैं और उनके मंत्रों का जप करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भुवनेश्वरी साधना मन को स्थिर करती है, भय को दूर करती है और साधक को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की शक्ति देती है। शास्त्रीय दृष्टि से देवी को शिव की अनंत शक्ति का स्वरूप माना गया है, जहाँ शिव और शक्ति एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि एक ही सत्य के दो पहलू हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी पूजा भले ही भिन्न रूपों में होती हो, लेकिन उनका मूल भाव एक ही रहता है, संपूर्ण जगत में व्याप्त दिव्य चेतना का अनुभव। यह उत्सव साधक को भीतर से मजबूत बनने, करुणा विकसित करने और जीवन को अधिक संतुलित व सजग दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिभाद्रपद, शुक्ल द्वादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवदेवी भुवनेश्वरी
अंतिम संशोधन23 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव 23 सितंबर 2026 (बुधवार) को है।
देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव भाद्रपद, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।