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चैत्र स्कन्द षष्ठी

12 अप्रैल 2027 · सोमवार चैत्र, शुक्ल षष्ठी

चैत्र माह 2027 में स्कन्द षष्ठी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

चैत्र स्कन्द षष्ठी 2027 कब है?

चैत्र स्कन्द षष्ठी 2027 सोमवार, 12 अप्रैल 2027 को मनाई जाएगी। चैत्र स्कन्द षष्ठी की तिथि चैत्र, शुक्ल षष्ठी है। चैत्र स्कन्द षष्ठी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:39 – 08:11 तक रहेगा।

दिनांक12 अप्रैल 2027
तिथिचैत्र, शुक्ल षष्ठी
पूजा मुहूर्त05:39 – 08:11
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिचैत्र, शुक्ल षष्ठीचैत्र माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान कार्तिकेय
वार-देवताशिव जीसोमवार
नक्षत्रमृगशिराशोभन
संक्षिप्त परिचय

चैत्र स्कन्द षष्ठी का महत्व और उत्सव

चैत्र स्कन्द षष्ठी चैत्र, शुक्ल षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल षष्ठी
नक्षत्रमृगशिरा
योगशोभन
करणकौलव
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

चैत्र स्कन्द षष्ठी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:03 – 04:51 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:39 – 08:11 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:33 – 12:24 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:37 – 17:28 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:31 – 18:43 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 07:13 – 08:48 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 11 Apr 09:39 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:03–04:51
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:39–08:11
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:33 – 12:24
तिथि समाप्त 12 Apr 07:34 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:31–18:43

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

चैत्र स्कन्द षष्ठी — महत्व, कथा और परंपरा

चैत्र स्कन्द षष्ठी का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। चैत्र का महीना वसंत ऋतु का समय होता है, जब प्रकृति में नवीनता के साथ शक्ति और उत्साह का संचार दिखाई देता है। इसी पावन काल में स्कन्द षष्ठी बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को कुमार कार्तिकेय ने तारकासुर नामक राक्षस का वध कर देवताओं को भयमुक्त किया था। भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है, इसलिए दक्षिण भारत में उन्हें मुरुगन के नाम से विशेष श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति तथा रोग, दुख और दरिद्रता से मुक्ति का विश्वास किया जाता है। परंपरा अनुसार अखंड दीपक प्रज्ज्वलित कर भगवान मुरुगन की आराधना की जाती है और उनके मंत्र का यथाशक्ति जप किया जाता है। यह पर्व साहस, संरक्षण और आत्मबल का प्रतीक माना जाता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

चैत्र स्कन्द षष्ठी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिचैत्र, शुक्ल षष्ठी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान कार्तिकेय
अंतिम संशोधन18 Jun 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में चैत्र स्कन्द षष्ठी 12 अप्रैल 2027 (सोमवार) को है।
चैत्र स्कन्द षष्ठी चैत्र, शुक्ल षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।