चैत्र पूर्णिमा व्रत — महत्व, कथा और परंपरा
चैत्र मास की पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा या चैती पूनम कहा जाता है। चैत्र हिंदू पंचांग का प्रथम मास होने के कारण इस पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। वसंत ऋतु के इस समय में प्रकृति पूर्ण रूप से खिली होती है और यही पूर्णता इस तिथि के आध्यात्मिक भाव में भी झलकती है। चैत्र पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा का विशेष विधान है। इस अवसर पर नदी, तीर्थ, सरोवर या किसी पवित्र जलकुंड में स्नान कर दान-पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में महारास का आयोजन किया था। इस तिथि पर भगवान विष्णु की आराधना और व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और स्थिरता आती है तथा घर-परिवार में धन-धान्य की समृद्धि बनी रहती है।