हिन्दू पंचांग का प्रथम मास चैत्र और अंतिम मास फाल्गुन माना जाता है। दोनों ही वसंत ऋतु में आते हैं, जब प्रकृति नवजीवन से भर उठती है और वातावरण में उल्लास का संचार होता है। चैत्र मास का नाम चित्रा नक्षत्र से जुड़ा है। अमावस्या के बाद चंद्रमा जब मेष राशि में अश्विनी नक्षत्र से यात्रा आरंभ करता है और प्रतिदिन अपनी कलाओं को बढ़ाते हुए पंद्रहवें दिन चित्रा नक्षत्र में पूर्णता प्राप्त करता है, तभी उस मास को चैत्र कहा जाता है। ज्योतिष परंपरा में ग्रहों, तिथियों, पक्षों, मास और ऋतुओं की गणना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही मानी जाती है। इसी तिथि से विक्रम संवत का नववर्ष आरंभ होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवरात्रि में दुर्गा पूजन का शुभारंभ होता है। साथ ही, राजा रामचंद्र और युधिष्ठिर के राज्याभिषेक तथा सिख परंपरा के द्वितीय गुरु, गुरु अंगददेव का जन्म भी इसी पावन मास से जुड़ा हुआ है।