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चैत्र अमावस्या

6 अप्रैल 2027 · मंगलवार फाल्गुन, कृष्ण अमावस्या

चैत्र अमावस्या कब है?

संक्षिप्त उत्तर

चैत्र अमावस्या 2027 कब है?

चैत्र अमावस्या 2027 मंगलवार, 6 अप्रैल 2027 को मनाई जाएगी। चैत्र अमावस्या की तिथि फाल्गुन, कृष्ण अमावस्या है। चैत्र अमावस्या की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:45 – 08:15 तक रहेगा।

दिनांक6 अप्रैल 2027
तिथिफाल्गुन, कृष्ण अमावस्या
पूजा मुहूर्त05:45 – 08:15
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, कृष्ण अमावस्याचैत्र माह के व्रत-त्योहार
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रउत्तर भाद्रपदब्रह्म
संक्षिप्त परिचय

चैत्र अमावस्या का महत्व और उत्सव

चैत्र अमावस्या फाल्गुन, कृष्ण अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण अमावस्या
नक्षत्रउत्तर भाद्रपद
योगब्रह्म
करणचतुष्पद
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

चैत्र अमावस्या के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:09 – 04:57 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:45 – 08:15 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:35 – 12:25 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:36 – 17:26 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:29 – 18:41 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:08 – 16:42 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 06 Apr 05:40 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:09–04:57
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:45–08:15
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:35 – 12:25
तिथि समाप्त 07 Apr 05:20 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:29–18:41

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

चैत्र अमावस्या — महत्व, कथा और परंपरा

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली अमावस्या को चैत्र अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि विक्रमी संवत का अंतिम दिन मानी जाती है, जबकि अगले दिन से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होता है। चैत्र का महीना वसंत ऋतु का प्रतीक है, जब प्रकृति नवचेतना और परिवर्तन के दौर से गुजरती है, और इसी भाव के साथ यह अमावस्या आत्मचिंतन और पितृ स्मरण का अवसर देती है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में स्थित होते हैं, जिससे यह तिथि पितरों के मोक्ष और शांति के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद नदी में तिल प्रवाहित कर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है और पितरों का तर्पण किया जाता है। चैत्र अमावस्या जीवन में नई शुरुआत से पहले शुद्धि, कृतज्ञता और संतुलन का संदेश देती है।

आवर्ती व्रत

अन्य अमावस्या तिथियाँ

सभी अमावस्या तिथियाँ देखें →
नामतिथिवारपक्ष/तिथिदिन शेष
सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 शनिवार भाद्रपद, कृष्ण अमावस्या 19 दिन शेष देखें
कार्तिक अमावस्या 9 नवंबर 2026 सोमवार आश्विन, कृष्ण अमावस्या 48 दिन शेष देखें
मार्गशीर्ष अमावस्या 8 दिसंबर 2026 मंगलवार कार्तिक, कृष्ण अमावस्या 77 दिन शेष देखें
माघ दर्श अमावस्या 6 फरवरी 2027 शनिवार पौष, कृष्ण अमावस्या 137 दिन शेष देखें
मौनी अमावस्या 6 फरवरी 2027 शनिवार पौष, कृष्ण अमावस्या 137 दिन शेष देखें
फाल्गुन अमावस्या 8 मार्च 2027 सोमवार माघ, कृष्ण अमावस्या 167 दिन शेष देखें

पूरा वार्षिक कैलेंडर, व्रत विधि और पारण नियम — अमावस्या हब पेज पर देखें।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

चैत्र अमावस्या की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, कृष्ण अमावस्या
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)फाल्गुन
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन फाल्गुन माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में चैत्र अमावस्या 6 अप्रैल 2027 (मंगलवार) को है।
चैत्र अमावस्या फाल्गुन, कृष्ण अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।