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चैतन्य महाप्रभु जयन्ती

22 मार्च 2027 · सोमवार फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा

फाल्गुन माह 2027 में चैतन्य महाप्रभु जयन्ती कब है?

संक्षिप्त उत्तर

चैतन्य महाप्रभु जयन्ती 2027 कब है?

चैतन्य महाप्रभु जयन्ती 2027 सोमवार, 22 मार्च 2027 को मनाई जाएगी। चैतन्य महाप्रभु जयन्ती की तिथि फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा है। चैतन्य महाप्रभु जयन्ती की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:00 – 08:26 तक रहेगा।

दिनांक22 मार्च 2027
तिथिफाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त06:00 – 08:26
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा फाल्गुन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताचैतन्य महाप्रभु
वार-देवताशिव जीसोमवार
नक्षत्रउत्तर फाल्गुनीगण्ड
संक्षिप्त परिचय

चैतन्य महाप्रभु जयन्ती का महत्व और उत्सव

चैतन्य महाप्रभु जयन्ती फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन चैतन्य महाप्रभु की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पूर्णिमा
नक्षत्रउत्तर फाल्गुनी
योगगण्ड
करणबव
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

चैतन्य महाप्रभु जयन्ती के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:24 – 05:12 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:00 – 08:26 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:40 – 12:29 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:32 – 17:21 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:22 – 18:34 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 07:31 – 09:02 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 21 Mar 06:21 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:24–05:12
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:00–08:26
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:40 – 12:29
तिथि समाप्त 22 Mar 04:13 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:22–18:34

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

चैतन्य महाप्रभु जयन्ती — महत्व, कथा और परंपरा

भक्तिकाल के प्रमुख संतों में से एक चैतन्य महाप्रभु का जन्म फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, अर्थात होलिका दहन के दिन, बंगाल के नवद्वीप नगर में हुआ था। वे वैष्णव परंपरा में भक्ति योग के महान प्रचारक और भक्तिकाल के प्रमुख संत-कवियों में गिने जाते हैं। उनके अनुयायी इस पूर्णिमा को ‘गौर पूर्णिमा’ के रूप में मनाते हैं, जो उनकी जयंती का ही उत्सव है। श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु अपनी दिव्य स्वर्णिम आभा के कारण गौरांग, गौर हरि और गौर सुंदर जैसे नामों से भी प्रसिद्ध हैं। चैतन्य महाप्रभु ने अपने उपदेशों और भक्ति आंदोलन के माध्यम से जन-जन के हृदय को गहराई से प्रभावित किया। अपने समय में उनके समान लोकमानस को प्रभावित करने वाला आचार्य विरले ही हुआ है। उनके द्वारा प्रचारित प्रेम, भक्ति और संकीर्तन की परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

चैतन्य महाप्रभु जयन्ती की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवचैतन्य महाप्रभु
अंतिम संशोधन28 Mar 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में चैतन्य महाप्रभु जयन्ती 22 मार्च 2027 (सोमवार) को है।
चैतन्य महाप्रभु जयन्ती फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।