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भीष्म द्वादशी

18 फरवरी 2027 · गुरुवार माघ, शुक्ल द्वादशी

माघ माह 2027 में भीष्म द्वादशी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

भीष्म द्वादशी 2027 कब है?

भीष्म द्वादशी 2027 गुरुवार, 18 फरवरी 2027 को मनाई जाएगी। भीष्म द्वादशी की तिथि माघ, शुक्ल द्वादशी है। भीष्म द्वादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:31 – 08:47 तक रहेगा।

दिनांक18 फरवरी 2027
तिथिमाघ, शुक्ल द्वादशी
पूजा मुहूर्त06:31 – 08:47
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमाघ, शुक्ल द्वादशीमाघ माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतापितामह भीष्म
वार-देवताभगवान विष्णुगुरुवार
नक्षत्रपुनर्वसुआयुष्मान
संक्षिप्त परिचय

भीष्म द्वादशी का महत्व और उत्सव

भीष्म द्वादशी माघ, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन पितामह भीष्म की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वादशी
नक्षत्रपुनर्वसु
योगआयुष्मान
करणबालव
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलदक्षिणदही खाकर

भीष्म द्वादशी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:55 – 05:43 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:31 – 08:47 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:49 – 12:34 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:22 – 17:07 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:05 – 18:17 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 13:37 – 15:02 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 17 Feb 05:31 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:55–05:43
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:31–08:47
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:49 – 12:34
तिथि समाप्त 18 Feb 02:27 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:05–18:17

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

भीष्म द्वादशी — महत्व, कथा और परंपरा

माघ शुक्ल द्वादशी का दिन भीष्म द्वादशी के नाम से स्मरण किया जाता है—वह पुण्य घड़ी जब प्रतापी पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर देह-त्याग का वरण किया। महाभारत बताती है कि अष्टमी तिथि पर तीरों की शय्या स्वीकार कर चुके भीष्म ने, सूर्य के दक्षिणायन रहने से, योगबल से प्राण रोके रखे; उत्तरायण के उदय पर ही परमधाम प्रस्थान किया। परम्परा है कि आज के दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण का पूजन, तिल-जल तर्पण और दान कर भीष्म को कृतज्ञता अर्पित करते हैं। यह कथा याद दिलाती है कि शिखंडी पर शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा निभाते हुए भीष्म ने स्वेच्छा से अस्त्र छोड़े और धर्म-पालन के लिए शरशय्या वरण की। भीष्म द्वादशी का व्रत साधक को अडिग संकल्प, त्याग और धर्मनिष्ठा का आदर्श सिखाता है तथा कुल-कल्याण का आशीष देता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

भीष्म द्वादशी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमाघ, शुक्ल द्वादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवपितामह भीष्म
अंतिम संशोधन30 Mar 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में भीष्म द्वादशी 18 फरवरी 2027 (गुरुवार) को है।
भीष्म द्वादशी माघ, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।