हिन्दू व्रत एवं त्यौहार - BhaktiSarovar.in

भीष्म अष्टमी

14 फरवरी 2027 · रविवार माघ, शुक्ल अष्टमी

माघ माह 2027 में भीष्म अष्टमी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

भीष्म अष्टमी 2027 कब है?

भीष्म अष्टमी 2027 रविवार, 14 फरवरी 2027 को मनाई जाएगी। भीष्म अष्टमी की तिथि माघ, शुक्ल अष्टमी है। भीष्म अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:34 – 08:49 तक रहेगा।

दिनांक14 फरवरी 2027
तिथिमाघ, शुक्ल अष्टमी
पूजा मुहूर्त06:34 – 08:49
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमाघ, शुक्ल अष्टमी माघ माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभीष्म पितामह
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्रकृत्तिकाब्रह्म
संक्षिप्त परिचय

भीष्म अष्टमी का महत्व और उत्सव

भीष्म अष्टमी माघ, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भीष्म पितामह की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल अष्टमी
नक्षत्रकृत्तिका
योगब्रह्म
करणविष्टि
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

भीष्म अष्टमी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:58 – 05:46 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:34 – 08:49 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:49 – 12:34 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:20 – 17:05 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:03 – 18:15 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 16:26 – 17:50 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 14 Feb 02:06 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:58–05:46
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:34–08:49
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:49 – 12:34
तिथि समाप्त 15 Feb 12:40 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:03–18:15

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

भीष्म अष्टमी — महत्व, कथा और परंपरा

माघ शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाने वाली भीष्म अष्टमी महाभारत के परम नायक, पराक्रमी भीष्म पितामह के निर्वाण-दिवस का स्मरण है। माना जाता है कि इसी तिथि पर उन्होंने शरशय्या पर योगबल से देह त्याग कर भगवत्-धाम की ओर प्रस्थान किया था। इस पावन दिवस पर इस्कॉन केन्द्रों से लेकर विष्णु-मंदिरों तक भव्य कीर्तन, पुष्प-अभिषेक और कथा-पाठ आयोजित होते हैं। श्रद्धालु प्रातः पवित्र नदियों में स्नान कर बिना सिले हुए श्वेत वस्त्र धारण करते हैं, फिर तिल-मिश्रित जल से ‘तर्पण’ अर्पित कर पितामह की आत्म-शांति और कुल-कल्याण की प्रार्थना करते हैं। उपवास, दान और तिल-तर्पण से संतान-सुख, पापकर्मों का क्षय तथा मोक्ष-प्राप्ति का शुभ आशीष मिलता है—यही संदेश भीष्म अष्टमी को युगों से साधकों को प्रेरित करता आया है।

 

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

भीष्म अष्टमी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमाघ, शुक्ल अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभीष्म पितामह
अंतिम संशोधन30 Mar 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

गूगल पर भक्ति सरोवर को अपना पसंदीदा स्रोत बनाएं

जब आप गूगल पर "भीष्म अष्टमी " या कोई भी व्रत-त्योहार खोजते हैं, तो गूगल आपको आपके पसंदीदा स्रोत से उत्तर दिखा सकता है। भक्ति सरोवर को अपना पसंदीदा स्रोत बनाने के लिए:

1
गूगल पर खोजेंकोई भी व्रत या त्योहार खोजें
2
भक्ति सरोवर चुनेंपरिणामों में हमारा लिंक ढूँढें और ⋮ (three-dot) मेनू दबाएं
3
"More from this site" चुनेंगूगल आपको भविष्य में भक्ति सरोवर के परिणाम प्राथमिकता से दिखाएगा
पसंदीदा स्रोत बनाएं →
सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में भीष्म अष्टमी 14 फरवरी 2027 (रविवार) को है।
भीष्म अष्टमी माघ, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।