भानु सप्तमी वह दिव्य अवसर है जब रविवार पर सप्तमी तिथि का संगम हो और सूर्य‑आराधना का अनूठा योग बन जाए। कार्तिक या माघ जैसे मासों में यह व्रत अतिरिक्त पुण्यदायी माना जाता है, क्योंकि ऋतु‑परिवर्तन के ऐसे समय सूर्य‑तेज शरीर और फसल दोनों को संजीवनी देता है। प्रातःकाल ताँबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चंदन, रक्त‑पुष्प, अक्षत और गेहूँ डालकर अर्घ्य अर्पित किया जाता है; इसी के साथ दीपदान से ग्रह‑दोषों का शमन और मानसिक शांति का अनुभव होता है। शास्त्रों की मान्यता है कि सूर्य‑पूजन बुद्धि, प्रतिरोध‑शक्ति और धन‑वृद्धि तीनों को साधता है, इसलिए दान तथा व्रत का पालन लक्ष्मी‑कृपा और रोग‑नाश का सरल उपाय माना गया है।