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भैया दूज या यम द्वितीया

11 नवंबर 2026 · बुधवार कार्तिक, शुक्ल द्वितीया

कार्तिक माह 2026 में भैया दूज या यम द्वितीया कब है?

संक्षिप्त उत्तर

भैया दूज या यम द्वितीया 2026 कब है?

भैया दूज या यम द्वितीया 2026 बुधवार, 11 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। भैया दूज या यम द्वितीया की तिथि कार्तिक, शुक्ल द्वितीया है। भैया दूज या यम द्वितीया की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:12 – 08:24 तक रहेगा।

दिनांक11 नवंबर 2026
तिथिकार्तिक, शुक्ल द्वितीया
पूजा मुहूर्त06:12 – 08:24
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिकार्तिक, शुक्ल द्वितीयाकार्तिक माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवतायमराज एवं यमुना
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रअनुराधाअतिगण्ड
संक्षिप्त परिचय

भैया दूज या यम द्वितीया का महत्व और उत्सव

भैया दूज या यम द्वितीया कार्तिक, शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन यमराज एवं यमुना की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वितीया
नक्षत्रअनुराधा
योगअतिगण्ड
करणकौलव
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

भैया दूज या यम द्वितीया के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:36 – 05:24 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:12 – 08:24 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:20 – 12:04 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:44 – 16:28 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:24 – 17:36 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 11:42 – 13:04 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 10 Nov 02:00 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:36–05:24
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:12–08:24
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:20 – 12:04
तिथि समाप्त 11 Nov 03:53 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:24–17:36

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

भैया दूज या यम द्वितीया — महत्व, कथा और परंपरा

कार्तिक शुक्ल द्वितीया—भैया दूज या यम द्वितीया—भाई-बहन के स्नेह का उज्ज्वल उत्सव है। पुराण-कथाएँ कहती हैं कि इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुँचे; यमुना ने तिलक कर आदर-सत्कार दिया, और यम ने प्रसन्न होकर वर दिया कि जो बहन इस तिथि पर भाई का तिलक करेगी, उसका भाई दीर्घायु और निरामय रहेगा। परम्परा के अनुसार सुबह यम-पूजन कर यमुना-जल से आच्छुत अभिषेक करना अकाल-मृत्यु के भय को दूर करता है। बहनें भाई को रोली-अक्षत से तिलक लगाती हैं, हाथ में सुपारी-कौड़ी देते हुए मंगल-सूत्र बाँधती हैं और मीठा-भोजन कराती हैं; बदले में भाई आजीवन रक्षा और सम्मान का वचन देता है। दीपावली से दो दिन बाद आने वाला यह पर्व शरद के शांत आलोक में परिवार-बंधनों को पुनः सुदृढ़ करता है और मोक्ष का आशीर्वाद भी संजोता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

भैया दूज या यम द्वितीया की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिकार्तिक, शुक्ल द्वितीया
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवयमराज एवं यमुना
अंतिम संशोधन20 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में भैया दूज या यम द्वितीया 11 नवंबर 2026 (बुधवार) को है।
भैया दूज या यम द्वितीया कार्तिक, शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।