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भगवान कल्की जन्मोत्सव

17 सितंबर 2026 · मंगलवार श्रावण, शुक्ल षष्ठी

श्रावण माह 2026 में भगवान कल्की जन्मोत्सव कब है?

संक्षिप्त उत्तर

भगवान कल्की जन्मोत्सव 2026 कब है?

भगवान कल्की जन्मोत्सव 2026 मंगलवार, 17 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। भगवान कल्की जन्मोत्सव की तिथि श्रावण, शुक्ल षष्ठी है। भगवान कल्की जन्मोत्सव की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:45 – 08:12 तक रहेगा।

दिनांक17 सितंबर 2026
तिथिश्रावण, शुक्ल षष्ठी
पूजा मुहूर्त05:45 – 08:12
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, शुक्ल षष्ठीश्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान कल्की
वार-देवताभगवान विष्णुमंगलवार
नक्षत्रअनुराधाविष्कम्भ
संक्षिप्त परिचय

भगवान कल्की जन्मोत्सव का महत्व और उत्सव

भगवान कल्की जन्मोत्सव श्रावण, शुक्ल षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान कल्की की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल षष्ठी
नक्षत्रअनुराधा
योगविष्कम्भ
करणतैतिल
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलदक्षिणदही खाकर

भगवान कल्की जन्मोत्सव के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:09 – 04:57 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:45 – 08:12 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:28 – 12:17 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:22 – 17:11 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:12 – 18:24 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 13:24 – 14:56 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 16 Sep 05:00 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:09–04:57
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:45–08:12
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:28 – 12:17
तिथि समाप्त 17 Sep 05:50 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:12–18:24

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

भगवान कल्की जन्मोत्सव — महत्व, कथा और परंपरा

कल्कि जन्मोत्सव उस प्रतीक्षित दिवस की स्मृति है जिस दिन विष्णु का दशम अवतार कल्कि सतयुग-कलियुग की संधि पर अवतरित होगा। कल्कि तथा श्रीमद्भागवत-पुराण दोनों बताते हैं कि उनका प्राकट्य सावन शुक्ल पक्ष की संध्या-व्यापिनी तिथि में, शंभल ग्राम के विहरित नामक ब्राह्मण-कुल में होगा। मान्यता है कि जब अधर्म अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचेगा, तब कल्कि घोड़े पर आरूढ़, खड्ग धारण कर दुष्ट शक्तियों का विनाश कर धर्म की पुनः स्थापना करेंगे; इसलिए उन्हें “निष्कलंक भगवान” कहा गया है। राजस्थान के निंबार्क पीठ से लेकर गुजरात के निष्कलंक-मंदिर तक देश-भर में कल्कि के अनेक देवालय पहले ही विराजमान हैं—विष्णु का यही ऐसा अवतार है जिसकी पूजा अवतरण से पूर्व ही प्रारम्भ हो चुकी है। भागवत के द्वादश स्कंध, अध्याय 2 में इस अवतार का विस्तार से वर्णन मिलता है, जिसे पढ़कर भक्त वर्ष में एक दिन कल्कि-जन्म की प्रतीक्षा को उत्सव-रूप देते हैं।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

भगवान कल्की जन्मोत्सव की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, शुक्ल षष्ठी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान कल्की
अंतिम संशोधन20 Aug 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में भगवान कल्की जन्मोत्सव 17 सितंबर 2026 (मंगलवार) को है।
भगवान कल्की जन्मोत्सव श्रावण, शुक्ल षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।