बलि प्रतिपदा — महत्व, कथा और परंपरा
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला बलि प्रतिपदा दीपावली-पंचक का चौथा सोपान है। सनत्कुमार-संहिता बताती है कि वामन अवतार धारण कर भगवान विष्णु ने कृष्ण त्रयोदशी से अमावस्या तक तीन ही पगों में त्रिलोक दैत्यराज बलि से प्राप्त कर उसे पाताल भेजा। बलि ने लोक-मंगल हेतु वर माँगा कि इन तीन दिनों में जो भी यमराज के लिए दीपदान करे, वह यम-यातना से मुक्त रहे और उसके गृह से लक्ष्मी कभी विरत न हो। विष्णु ने यह वर स्वीकार किया; तभी से दीप-मालिका का उत्सव प्रचलित हुआ। अतः बलि प्रतिपदा की सन्ध्या पर तिल-तेल का दीप दक्षिणाभिमुख जला कर यम को समर्पित किया जाता है, साथ ही राजा बलि की अटल दानशीलता और लक्ष्मी-कृपा का स्मरण कर घर-आँगन में दीर्घ समृद्धि की कामना की जाती है।