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बलि प्रतिपदा

10 नवंबर 2026 · मंगलवार कार्तिक, शुक्ल प्रतिपदा

कार्तिक माह 2026 में बलि प्रतिपदा कब है?

संक्षिप्त उत्तर

बलि प्रतिपदा 2026 कब है?

बलि प्रतिपदा 2026 मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। बलि प्रतिपदा की तिथि कार्तिक, शुक्ल प्रतिपदा है। बलि प्रतिपदा की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:12 – 08:24 तक रहेगा।

दिनांक10 नवंबर 2026
तिथिकार्तिक, शुक्ल प्रतिपदा
पूजा मुहूर्त06:12 – 08:24
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिकार्तिक, शुक्ल प्रतिपदा कार्तिक माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताराजा बलि
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रविशाखाशोभन
संक्षिप्त परिचय

बलि प्रतिपदा का महत्व और उत्सव

बलि प्रतिपदा कार्तिक, शुक्ल प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन राजा बलि की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्रविशाखा
योगशोभन
करणबव
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

बलि प्रतिपदा के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:36 – 05:24 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:12 – 08:24 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:19 – 12:03 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:44 – 16:28 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:24 – 17:36 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 14:27 – 15:49 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 09 Nov 12:31 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:36–05:24
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:12–08:24
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:19 – 12:03
तिथि समाप्त 10 Nov 02:00 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:24–17:36

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

बलि प्रतिपदा — महत्व, कथा और परंपरा

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला बलि प्रतिपदा दीपावली-पंचक का चौथा सोपान है। सनत्कुमार-संहिता बताती है कि वामन अवतार धारण कर भगवान विष्णु ने कृष्ण त्रयोदशी से अमावस्या तक तीन ही पगों में त्रिलोक दैत्यराज बलि से प्राप्त कर उसे पाताल भेजा। बलि ने लोक-मंगल हेतु वर माँगा कि इन तीन दिनों में जो भी यमराज के लिए दीपदान करे, वह यम-यातना से मुक्त रहे और उसके गृह से लक्ष्मी कभी विरत न हो। विष्णु ने यह वर स्वीकार किया; तभी से दीप-मालिका का उत्सव प्रचलित हुआ। अतः बलि प्रतिपदा की सन्ध्या पर तिल-तेल का दीप दक्षिणाभिमुख जला कर यम को समर्पित किया जाता है, साथ ही राजा बलि की अटल दानशीलता और लक्ष्मी-कृपा का स्मरण कर घर-आँगन में दीर्घ समृद्धि की कामना की जाती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

बलि प्रतिपदा की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिकार्तिक, शुक्ल प्रतिपदा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवराजा बलि
अंतिम संशोधन20 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में बलि प्रतिपदा 10 नवंबर 2026 (मंगलवार) को है।
बलि प्रतिपदा कार्तिक, शुक्ल प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।