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बैसाखी

14 अप्रैल 2027 · बुधवार चैत्र, शुक्ल अष्टमी

2027 में बैसाखी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

बैसाखी 2027 कब है?

बैसाखी 2027 बुधवार, 14 अप्रैल 2027 को मनाई जाएगी। बैसाखी की तिथि चैत्र, शुक्ल अष्टमी है। बैसाखी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:37 – 08:09 तक रहेगा।

दिनांक14 अप्रैल 2027
तिथिचैत्र, शुक्ल अष्टमी
पूजा मुहूर्त05:37 – 08:09
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिचैत्र, शुक्ल अष्टमीचैत्र माह के व्रत-त्योहार
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रपुनर्वसुसुकर्मा
संक्षिप्त परिचय

बैसाखी का महत्व और उत्सव

बैसाखी चैत्र, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल अष्टमी
नक्षत्रपुनर्वसु
योगसुकर्मा
करणबव
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

बैसाखी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:01 – 04:49 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:37 – 08:09 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:32 – 12:23 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:38 – 17:29 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:32 – 18:44 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 11:58 – 13:33 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 14 Apr 03:33 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:01–04:49
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:37–08:09
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:32 – 12:23
तिथि समाप्त 15 Apr 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:32–18:44

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

बैसाखी — महत्व, कथा और परंपरा

बैसाखी का पर्व मेष संक्रांति को मनाया जाता है और इसका विशेष महत्व पंजाब, हरियाणा तथा उत्तर भारत में देखा जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से फसल कटाई से जुड़ा हुआ है, जब खेतों में नई उपज के आने से किसानों के जीवन में उल्लास और संतोष का भाव होता है। असम में इसी अवसर को बिहू के रूप में मनाया जाता है, जबकि बंगाल में इसे पोइला बैसाख कहा जाता है, जहाँ यह सौर नववर्ष का प्रतीक है। मेष संक्रांति के समय पर्वतीय क्षेत्रों में मेलों का आयोजन होता है और देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, इसलिए पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। गंगा तट पर जाकर माँ गंगा की आरती करना इस दिन शुभ माना जाता है। बैसाखी प्रकृति, परिश्रम और आस्था के सामंजस्य का पर्व है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

बैसाखी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिचैत्र, शुक्ल अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
अंतिम संशोधन06 Jul 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में बैसाखी 14 अप्रैल 2027 (बुधवार) को है।
बैसाखी चैत्र, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।