आश्विन स्कन्द षष्ठी — महत्व, कथा और परंपरा
आश्विन शुक्ल षष्ठी को मनाई जाने वाली स्कन्द षष्ठी दक्षिण भारत में विशेष श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। पुराण‑कथा के अनुसार इसी तिथि पर कुमार कार्तिकेय ने दैत्य तारकासुर का वध कर धर्म की विजय का घोष किया, इसलिए यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कन्दमाता को कार्तिकेय की जननी कहा गया है, और उनके माध्यम से संतान‑रक्षा की कामना की जाती है। व्रती प्रातः स्नान कर लाल पुष्प, फल, तिल और गुड़ अर्पित करते हुए “ॐ स्कन्दाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करते हैं; यह साधना संतान के कष्ट हरती है और गृह‑कलह को शांत करती है। मान्यता है कि चैत्र या आश्विन मास से व्रत आरम्भ कर प्रत्येक शुक्ल षष्ठी को पालन करने से साहस, विजय‑भाव और पारिवारिक सौहार्द निरन्तर पुष्ट होता है।