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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि

15 जुलाई 2026 · बुधवार आषाढ़, शुक्ल प्रतिपदा

आषाढ़ में गुप्त नवरात्रि कब शुरू होगी?

संक्षिप्त उत्तर

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कब है?

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 बुधवार, 15 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की तिथि आषाढ़, शुक्ल प्रतिपदा है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:17 – 07:59 तक रहेगा।

दिनांक15 जुलाई 2026
तिथिआषाढ़, शुक्ल प्रतिपदा
पूजा मुहूर्त05:17 – 07:59
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिआषाढ़, शुक्ल प्रतिपदाआषाढ़ माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवतादस महाविद्या
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रपुष्यहर्षण
संक्षिप्त परिचय

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व और उत्सव

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आषाढ़, शुक्ल प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन दस महाविद्या की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्रपुष्य
योगहर्षण
करणबव
ऋतुवर्षादक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:41 – 04:29 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:17 – 07:59 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:36 – 12:31 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 17:02 – 17:56 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 18:03 – 19:15 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 12:04 – 13:45 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 14 Jul 03:12 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:41–04:29
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:17–07:59
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:36 – 12:31
तिथि समाप्त 15 Jul 11:50 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 18:03–19:15

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि — महत्व, कथा और परंपरा

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि साधकों के लिए विशेष महत्व रखती है। देवी भागवत बताता है कि वर्ष में चार नवरात्रियाँ होती हैं; चैत्र और आश्विन की खुली नवरात्रि में माँ के नौ रूपों की पूजा होती है, जबकि आषाढ़ और माघ की नवरात्रि को गुप्त कहा जाता है। माघ की गुप्त नवरात्रि उत्तर भारत में प्रसिद्ध है, पर आषाढ़ की नवरात्रि दक्षिण भारत में अधिक मनाई जाती है। इन नौ दिनों में उपवास रख-कर प्रतिपदा से नवमी तक सुबह-शाम माँ दुर्गा का आवाहन किया जाता है। साधक दस महाविद्याओं—काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला—का क्रम से पूजन-जप करते हैं। विश्वास है कि इस गुप्त साधना से आंतरिक शक्तियाँ जागृत होती हैं और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिआषाढ़, शुक्ल प्रतिपदा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवदस महाविद्या
अंतिम संशोधन19 Aug 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 (बुधवार) को है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आषाढ़, शुक्ल प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।