अपरा एकादशी — महत्व, कथा और परंपरा
शास्त्रों में यह तिथि अपरा या अचला एकादशी कही गई है, जब श्रद्धालु विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। मान्यता है कि नियमपूर्वक उपवास और पूजा से पुराने पाप भी धुल जाते हैं और मनोकामनाएँ कुछ ही समय में फल देने लगती हैं। इस वर्ष एकादशी के दिन चंद्रमा मेष में तथा सूर्य वृषभ में रहेंगे, जिसे शुभ संयोग माना गया है। कथा बताती है कि भगवान वामन की पूजा और अपरा एकादशी की कथा का श्रवण–पाठ सहस्र गोदान के बराबर पुण्य देता है। पद्म पुराण स्पष्ट करता है कि इस व्रत से चलती आर्थिक परेशानी दूर हो जाती है और घर में समृद्धि का प्रवेश होता है। दिन भर व्रत रख कर संध्या समय श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें—विश्वास रखें, विष्णु-कृपा अटके काम को भी सरल बना देती है।