भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की एकादशी अजा एकादशी कहलाती है; इसे जया तथा अन्नदा नाम से भी जाना जाता है। वर्षा थमने और धान की बालियाँ लहराने लगने के इस ऋतु-संधि में रखा गया उपवास भगवान विष्णु के उपेन्द्र रूप तथा माता लक्ष्मी दोनों का आशीष दिलाता है। व्रती प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करता है, घृत-दीप, तुलसी-दल एवं पंचामृत से श्रीहरि का पूजन करता है और दिन भर श्रीनाम का जप करता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत का माहात्म्य स्वयं श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया था, जो भक्त अजा एकादशी पर विष्णु-लक्ष्मी की आराधना करता है, उसके पूर्व जन्मों तक के पाप नष्ट होते हैं और उसे मनोवांछित फल प्राप्त होता है।